नोनी बाबू एक हे, झन कर संगी भेद ।रूढ़ीवाद बिचार ला, लउहा तैंहा खेद ।।
लउहा तैंहा खेद, नवा उजियारा आही।
पढ़ही बेटी एक, दुई घर सिक्छा लाही ।।
मान मिलन के गोठ, भ्रूणहत्या कर काबू ।
भेद छोड़ के भेज, पढ़े बर नोनी बाबू।। ✨
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पुस्तक कापी लानदे, बिसादे अउ सिलेट !
बरतन चउका झन करा, पढ़ाई ल झन मेट !!
पढ़ाई ल झन मेट, ज्ञान मान अधिकार दे!
बेटी बने पढ़ाव, चरित संसकार दे !!
आही सिक्छा काम, दरद दुख देही दस्तक !
मनुस छोड़थे संग, फेर नइछोड़य पुस्तक !!✨
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बेटी पढ़के बाँटही, गांव गांव मा ज्ञान !
परकेधन झन मान जी, इही देस के जान !!
इही देस के जान, पढ़लिख जुग सिरजाही !
रुकही अत्याचार, कुकर्मी दूर हटाही !!
कहे मलरिहा रोज, लान दे बसता पेटी !
अबतो जाग समाज, धरादे पुस्तक बेटी !!❄
बहू कहाॅंले लानबो, परते हवय अकाल ।
बेटा बेटा सब गुनय, इही जगत के हाल ।।
इही जगत के हाल, कोख भितरी मरवाथे ।
करले बने बिचार, दुवारी कोन सजाथे।।
कहत मलरिहा गोठ , मती मा तोर बसाले ।
छोड़ दिही संसार, लानबो बहू कहाँले ।।❄
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नोनी ला झन मान तैं, ए जिनगी के बोझ।
टूरा दरुहा टेड़गा, कोनो कोनो सोझ ।।
कोनो कोनो सोझ, जेन सरवन बन पाथे।
दिनभर टेड़े आॅंख , फोन मा गेम चलाथे ।।
सरत रहै कइ काम, कान मा खोचे पोनी।
दाई बाबू के गोठ, मानथे बेटी नोनी।।
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॥✍️ मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर