शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

गाड़ा रवन ले राजमार्ग- छत्तीसगढ़ी लेख

बीस बछर पहली, जेन गाड़ा रवन रहीस, तेन हर आज डामर के पक्की रोड बनगे, गाड़ा-बईला रेंगय तेमा आज भर्रौहन मोटर-गाड़ी दऊड़त हे, ए पार ले, ओ पार जाय मँ कई अपन जीव गवां देथे, पहली गाड़ा के आघू कोनो लईका खेतल खालत आ जावय त बईला अपने आप रुक जावत रहीस..जेन अब कम दिखथे।
गाड़ा-रवन ल राजमार्ग बने के बधाई  देहेबर गैंव त ओहा मोटर-गाड़ी के हाॅव-भाव-काॅव, सोर-सराका मं मोर आरो ल नई सुन पाइस लगथे..गलती मोर रहीस की मैं थोकिन कमजोरहा आरों दे पारेव l
मैं घर लहुटतेच रहें कि आरों आगे  "thanks milan".. मोला अचंभव लागीस कि जय-जोहार (पैलगी) करईया ह आज thanks कथे.. बने चेत धरके सुनेव त गाड़ा-रवन कहत रहीस -"मैं अब वो रवन नई रहिगेव, मैं राजमार्ग हवं राजमार्ग धोतीछाप पैदल मनखे के रेंगे खातिर सरकार ह मोला नई बनाय हे बलकि मोला, गाड़ी-मोटर, टरक-डंफर के दऊड़ेबर बनाय हे Please go from side to side....
//// मिलन मलरिहा///// मल्हार बिलासपुर


रविवार, 21 अक्तूबर 2018

आगे आगे फागुन- गीत । मिलन मलरिहा

//*आगे आगे फागुन*//
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आगे आगे फागुन रस टपके आमा के मऊँरे
पड़की-मैना के मन ला खिंचत हावय रे
लाली लाली परसा ह दुल्ही बने बईठे हे
मेछा ताने सेम्हरा ह दूल्हा खड़े हे....
आगे आगे फागुन.........
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खेतबीच नाँचतहे सरसो पीयर पीयर रे
मेड़ तीर मटकतहे, लम्बु राहेर  रे
दुनों झुमतहे जाबोन बरतिया कहिके
दऊड़ दऊड़ कोयली ह हाका पारत हे..
आगे आगे फागुन..........
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डुमर सास ह चमचम चमकत हावय रे
मऊँहा ससुर ह पागा बाँधे हे
चार-कसही मन, साला-साली बने हे
देखतो सेम्हरा के भाग जागे हे........

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तिवरा-अकरी दुनो नवा जिंस पहिरे
चना-बटुरा  बरतिया बने हे
बनकुकरा ह मोहरी ल तानत हावय

बरतिया खाये ल जाहा कहिके
आगे आगे फागुन.............
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मिलन मलरिहा
मल्हार

रविवार, 13 मई 2018

छोटा-लल्ला 'बालगीत

Hindibhashaa.com सावनी



माँ

माँ........
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हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?
आजतक मैंने, तुझको दिया ही क्या ?
जो किया,  मैंने  खुद के  लिए किया ?
बस दिया, मुझसे  तुने लिया ही क्या ?

आपने मुझमें पल पल सभ्यता गढ़ी
पर मैनें एकबार भी निभाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?

आपने पत्थर में कमल खिला ही दिया
पर कमल पत्थरों में घर बसाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?

मेरे लिए आपने कितनी यातनाएं सही
पर तुने कभी मुझे दुख जताया ही क्या......
हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?
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रचना--
मिलन
        मलरिहा