रविवार, 21 अक्तूबर 2018

आगे आगे फागुन- गीत । मिलन मलरिहा

//*आगे आगे फागुन*//
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आगे आगे फागुन रस टपके आमा के मऊँरे
पड़की-मैना के मन ला खिंचत हावय रे
लाली लाली परसा ह दुल्ही बने बईठे हे
मेछा ताने सेम्हरा ह दूल्हा खड़े हे....
आगे आगे फागुन.........
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खेतबीच नाँचतहे सरसो पीयर पीयर रे
मेड़ तीर मटकतहे, लम्बु राहेर  रे
दुनों झुमतहे जाबोन बरतिया कहिके
दऊड़ दऊड़ कोयली ह हाका पारत हे..
आगे आगे फागुन..........
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डुमर सास ह चमचम चमकत हावय रे
मऊँहा ससुर ह पागा बाँधे हे
चार-कसही मन, साला-साली बने हे
देखतो सेम्हरा के भाग जागे हे........

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तिवरा-अकरी दुनो नवा जिंस पहिरे
चना-बटुरा  बरतिया बने हे
बनकुकरा ह मोहरी ल तानत हावय

बरतिया खाये ल जाहा कहिके
आगे आगे फागुन.............
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मिलन मलरिहा
मल्हार

रविवार, 13 मई 2018

छोटा-लल्ला 'बालगीत

Hindibhashaa.com सावनी



माँ

माँ........
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हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?
आजतक मैंने, तुझको दिया ही क्या ?
जो किया,  मैंने  खुद के  लिए किया ?
बस दिया, मुझसे  तुने लिया ही क्या ?

आपने मुझमें पल पल सभ्यता गढ़ी
पर मैनें एकबार भी निभाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?

आपने पत्थर में कमल खिला ही दिया
पर कमल पत्थरों में घर बसाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?

मेरे लिए आपने कितनी यातनाएं सही
पर तुने कभी मुझे दुख जताया ही क्या......
हे माँ! मैंने तेरे  लिए  किया ही क्या ?
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रचना--
मिलन
        मलरिहा

रविवार, 4 फ़रवरी 2018

sher aur chuha (शेर और चूहा) -बालगीत

एक और चूहा
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बात बड़ी पुरानी है
एक चूहे की कहानी है

एक शेर था उस वन में
डर फैला था जन जन में

सारा जंगल परेशान था
बल का उसको अभिमान था

एकदिन आया वहां शिकारी
जाल फैलाया चउओर सारी

उसमें फस गया शेरु राजा
अकड़ का उसका बज गया बाजा

फिर चूहे को दया आ गया
जाल काटकर उसे बचाया

शेरु ने अपनी गलती मानी
जुरमिल कर रहने की ठानी

यही है जीवन की सच्चाई
छोटा बड़ा नई कोई भाई

मिलन मलरिहा
मल्हार
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