सोमवार, 11 जनवरी 2016

नवा बछर

नवा बछर म जून्ना कलेण्डर बदले भर ले का होही ?

बदलना हे त बीचार ल बदल समाज के मान होही

नसा कूबूध बुराई ल भेज दे 2015 के संगे

परघा सत ईमान अंजोर जीनगी उजियार होही

परन करले नवा बछर म गलती म सुधार लाबो

मया पीरित के गांव गलि म सुघ्घर किरतन गाबो

तोर मोर खचवा डबरा ल झांके ताके ले का होही ?

जाड़ म ठुठरत डोकरी डोकरा परे हे घर के कोन्टा

जग ल मेसेज भेजे अउ गिफ्ट देहे भर ले का होही ?

नवा बछर म जून्ना कलेण्डर बदले भर ले का होही ?
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मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

**कवि मोला झिन कईहा**

**कवि मोला झिन कईहा**
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कवि मोला झिन कईहा संगी
मयतो एक छत्तीसगढ़िहा अव
नांगर के जोतईया मय ग
बईला-भईसा के चरईया अव
कवि मोला..........................


चटनी बासी के खवईया मय ह
बर-छाईहा के सुतईया अव
फदके झगरा- लड़ाई हे कहूँ त
सबो के मय समझईया अव
कवि मोला..........................


मय तो मया बगरईया अव
दूखपीरा के पियईया अव
बुता-बनी कमईया अव ग
सबके बोझा बोहईया अव
कवि मोला..........................


मोटर न सईकल मोर दूवारी
उखरा गोड़ के चलईया अव
रेंगईया अव कई कोस मय हर
मूड़ी म खुमरी के बंधईया अव
कवि मोला..........................


बेलासपुर मल्हारे रहईया मय ह
निच्चट छत्तीसगढ़ी बोलईया अव
मनदिर मसजीद जवईया नोहव
दाई ददा के गोड़ चपकईया अव
कवि मोला..........................
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मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

जिनगी म का हे ?**

**जिनगी म का हे ?**
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जिनगी म का हे
मेलजोल अउ मया हे
सबले हासना गुठीयाना हे
इही तो जिनगी के खजाना हे
सब मनखे मनखे एकेच समाना हे।
जिनगी म.......................................

जिनगी म का हे
सबके आसिरवाद हे
सुखदूख के छईहा अउ घाम हे
आना जाना सबो के एके समान हे
खचवा डिपरा त कहू पाठेपाठ बरोबर हे।
जिनगी म............................................

जिनगी म का हे
मया अउ पीरा बड़ हे
एकर चक्का नर अउ नारी हे
एहर तो गाड़ी हे सबो परवार सवारी हे
एकाक चक्का टूटथे गिरथे मुड़भरसा-उतानी हे।
जिनगी म...................................................

जिनगी म का हे
दूखदरद के हिस्सा हे
सबके अपन अपन किस्सा हे
कहूँ चटनी कहूँ मेवा कहूँ सुख्खा रोटी हे
कहूँ जूवा कहूँ दारु सबोके दूख सहइया बेटी हे।
जिनगी म...................................................

जिनगी म का हे
कहू लीम कहू बरछाव हे
ओतकेकन सुख ओतकेकन घांव हे
सबला तो जाना हे त काबर गरभ- ताव हे
ए ठुड़गा बमरी ल ऐकदिन चूल्हा म जोराना तो हे।
जिनगी म......................................................

मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

नवा बछर म का चरित्तर आगे


मिलन मलरिहा's photo.

**नवा बछर म का चरित्तर आगे **

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2015 म लईका अउ जवान
सबो बेरा मोबाइल के धियान
इन्टरनेटवा बनगे सबके परान
अब 2016 म थीरी-जी छागे
जेमा डोकरा मन घलो झोरसागे
नवा बछर म का चरित्तर आगे ?


नवा जूगके इही भगवान बनगे
इनटरनेट के नदिया बोहागे
गाँव गलिखोल सबो समागे
वाट्सेफ धून घरोघर मतागे
दूनियाभर ह इही म बोजागे
नवा बछर म.......................

डोकरा लईका सियान भाए
दाई-ददा ह घलो मूड़ी नवाए
मोर बबा घलो गुरुफ बनाए
गुरुफ म एडमिन नाव रखागे
नवानवा दोस्ती-यारी छागे
नवा बछर म.......................

कापी पेस्ट ल रोज पेलत हे
एति के ओति ओहर ढिलत हे
महिना म कई हजार फूकत हे
गुरुफ गुरुफ म नाव बड़त हे
मुड़ी म ओखर इन्टरनेट जागे
नवा बछर म.......................

आनिबानी के सनिमा देखत हे
फोन ल दिनभर लाॅक करत हे
डर म मोर लुकावत चपकत हे
उमर के ओला फिकर नई हे
धान बेच मोबाईल खरिदागे
नवा बछर म.......................

पोरफाईल म तो जवान देखात हे
वाट्सेप संगे फेसबूक चलात हे
दूनियाभर ल लाईक मारत हे
बने-बने ल जी सेयर चपकत हे
संगी-यारी के फाईल टैग पेलागे
नवा बछर म...........................

गांव भर के फेसबूक पेज बनाए
मोबाईल संगे लेपटाॅप बिसाए
बबा गाँव म ब्राडबेन्ड लगवाए
वाई-फाई ल पूरा गाँव बगराए
नेट चलवईया जागरुक होगे
गाॅवभर बबा ल सरपंच जितागे
नवा बछर म...........................


मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

बुधवार, 9 दिसंबर 2015

साहेब छत्तीसगढ़ी गोठिया ले



** साहेब छत्तीसगढ़ी गोठिया ले **
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मया पीरा ल जान ले संगी
बोली-भाखा ल पहिचान ले
छत्तीसगढ़ी हे महतारी-भाखा
बचकानी के दिन बीचार ले
गाँव गलि के चिखला माटी
पैरा म सब खेलन उलानबाटी
छू-छुवाउल गिल्ली-डनडा
अउ खेलन संगे लुका-छिपी
मया पीरा के भाखा सोरिया ले
साहेब छत्तीसगढ़ी गोठिया ले.......
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अड़बड़ खाए अंगाकर रोटी
चिला ठेठरी अइरसा खुरमी
इडली डोसा के चक्कर परके
फरा अइरसा ल भूला डारे
चूल्हा गोरसी के आगी छोड़के
सुखसूबीधा के पागा बांधडारे
छत्तीसगढ़ी खटिया ल टोर
हिनदी ल पलंग बना डारे
मया पीरा के भाखा सोरिया ले
साहेब छत्तीसगढ़ी गोठिया ले.......
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काटागड़थे त दाई गोहराथन
छत्तीसगढ़ी म आसू गिराथन
सपनाघलो ओही म सपनाथन
दूख-दरद के गोठ बतियाथन
बरा सोहारी ओही म मानथन
पंडवानी करमा पंथी गाथन
नाचा ददरिया म दिन पहाथन
हिनदी ल महतारी कइसे मानले
मया पीरा के भाखा सोरिया ले
साहेब छत्तीसगढ़ी गोठिया ले.......
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मया पीरा ल जान ले संगी
बोली-भाखा ल पहिचान ले
छत्तीसगढ़ी हे महतारी-भाखा
बचकानी के दिन बीचार ले
साहेब छत्तीसगढ़ी गोठिया ले.......
साहेब छत्तीसगढ़ी गोठिया ले.......


मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर
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शनिवार, 5 दिसंबर 2015

****** पागा ****** दोहा

# पागा(मान)/ पगड़ी # दोहा
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 छत्तीसगढ़िया 'पागा', रख ग बने पोटार।
पागा गिरही जेन दिन,जाहि इमान बजार।।
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पईसा रुपिया सूध म, भागत हे सनसार।
इमान कइसे बिसाबे, रुपिया हे भरमार।।
-
सूत सूत म बसे धरे, जीनगी के कमाय।
पागा खूलत देर हे, झटकुन ओहा जाय।।
-
सरपंच के पागा गए, गाँव नाके कटाय।
मनखे ले गलती होए, परवार दूख पाय।।
-
तीन-पाँच छोड़ मितान, ईमान रख कमाय।
बने बने के सबे हे, नइतो सब दुरिहाय।।
-
रुपिया-मान जेन धरे, ओही मनुस कहाय।
जोर सकेल दुनो ल तय, पड़ाइ सरल उपाय।।
-
मेहनत करले बेटा, पड़ाइ के दिन आय।
बोचकही बेरा तोर, फेर पाछु पछताय।।


मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

**चला रे संगी**


चला रे संगी चला रे साथी 
घरोघर बहरी निकालबो रे
गाँव गलि ल सुवक्छ बहारके
छत्तीसगढ़ ल महकाबो रे
महतारी के ओनहा चिखलागे
खचवा डबरा ल पाटबो रे
जूरमिल सुवक्छ्ता गीत गाबो रे
चला रे संगी ....................

जोंगईया सबो करईया हे कोन
नेता बस बहरी धरईया रे
अधिकारी पाछू चलईया संगी
मिलजूल फोटू खिचवईया रे
आवत जावत देखावा करथे
कोनो नई हावय करईया रे
अपन गलि-घर खूद जतनबो रे
चला रे संगी .......................

हमला हे रहना गाँव-शहर म
त हमी ल हावय सजाना रे
आवा निकला घरघर ले संगी
सफाई अभयान ढोल बजावा रे
सबो जघा ल सुघ्घर चमकाके
छत्तीसगढ़ ल सरग बनाबो रे
सुवक्छता नारा मन म बसाबो रे
चला रे संगी ...........................

कचरा—कुबुध्दी ल टमरके-धरके
सड़क गलि-समाज ले निकालबो रे
मन-बीचार म बईठे दवेस जलन ल
निकालके सबझन फेकबो रे
जाति-पाति भेद राक्छस ल मारके
संगेसंग रहिबो जीबो-मरबो रे
सरग जईसन छत्तीसगगढ़ बसाबो रे
चला रे संगी ...............................

चला रे संगी चला रे साथी 
घरोघर बहरी निकालबो रे
गाँव गलि ल सुवक्छ बहारके
छत्तीसगढ़ ल महकाबो रे


मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

सोमवार, 30 नवंबर 2015

॥॥ ॥ सुवच्छता के बीसय म॥॥॥॥ DOHA

**छत्तीसगढ़ के पागा**


घर के कुड़ा सकेल के , घुरवा ले के डार।
खातू बनही काम के, नई लगही उधार।।
जेबीक खातू छिच के, खेत ल बने सवार।
कीटनासक ल छोड़के , घरके दार बघार।।
जग म कचरा बिखरे हे, बनजर होवत खार।
झोला धरे बजार जा, झिल्ली पन्नी बीदार।।
मन के कचरा ल पहली , फेर फेक आने ल।
झिल्ली कुड़ाकरकट लद्दी, धर सकेल अपने ल।।
खुद तही सुधर ग लहरी, सनसार सुधर जाय।
सबो जीव सुयम एक हे, नइ लगय कछु उपाय।।
जेन ल देख तेन भाइ, फोटु खिचाए ल आय।
जोंगय ओहा सबो ल, अपन नेता कहाय।।
बड़हत परदूसन धरा, दिनदिन पानि भगाय।
किसान रोवय किसानी, काला दूख बताय।।
आवा मिलके टुट पड़ा, कचरा राक्छस ताय।
झउहा झउहा फेकदे, खचवा तरि कुड़हाय।।
सुवक्छता बर परन करा, कचरा रख सकलाय।
कुड़ादान म रखबो जी, चाहे घुरवा जाय।।


मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

गुरुवार, 19 नवंबर 2015

****आतंकवाद****

    ****आतंकवाद****
     ** ((दोहा))**
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नकसली के बड़ेददा,  हवे आतंकवाद।
देसपरदेस ल जाके,  करदेथे बरबाद।।

आतंकवाद  पूजेरि, दाउद हवय फरार।
छोटा राजन आए अभि, पुलीस के दूवार।।

पाकिसतान पोसत हे, भारत झेलय मार।
नकसली  बनदुक बाटे,  करय ग अतियाचार।।

छत्तीसगढ़ महतारी ल, घेरे नकसलवाद।
नकसली करे काटमार, सिखत आतंकवाद।।

बीजापुर के कनिहा म, मचाथे ग उतपात।
कोनटा अउ कानकेर, रोवय नवाए माथ।।

अगोरा रहिच दाई ल,  सहीद होगे लाल ।
देस-माई बर परान,  देहीस बीन-काल ।।

कोख ह उजरगे दाई, घर सून्ना होगे ग।
आखी ह अब सूखागे, आसु सबो ढरगे ग।।

खून छलकत माटि म, जानेकब रुकही ग।
महतारी बर बली अब, कतेक लाल दिही ग।।

आतंकवाद जरि बिछे, भारत माटि म आए।
राकछस इहि नवा जूग, कोन संहार कराए।।
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मिलन मलरिहा 
मल्हार बिलासपुर

*हाइकू* (वर्णिक छन्द)------------***फेसबुकिया वाटसफिया चोर***


फेसबुकिया 
वाटसफिया चोर
*हाइकू* मोर
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चोर हे चोर
भाजी साग जइसे
तरी म झोर ।          (1)

चटके हे जी
साहित्य के कराही
खो जर जाही ।       (2)

हकाल ओला
हमर बारी कोला
भरत हे झोला ।      (3)

काम हमर
अपन नाव लिखे
कवि तै दिखे ।       (4)

आने के बारी
टोरे भाटा मुरई
लेगत जाई ।          (5)

देखहू तोला
फेर काली आबे रे
लुटहू झोला।         (6)

कापी पेस्ट ल
झीन कर तयहा
अभी चेत ज।        (7)

चोरी लेख म
का पाबे रे गियान
उहे रुक ज ।        (8)

तै पकड़ाबे
जेनदीन पगला
मान गवाबे।          (9)

नाक तै कटाबे
संगीसाथी छूटही
त रोबे गाबे।         (10)
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मिलन मलरिहा 
मल्हार बिलासपुर

गाड़ा रवन गवागीस


सोमवार, 16 नवंबर 2015

**गरीब बर का देवारी**


दिया बरत हे जगमक जगमक
फूटहा हे कोठी टूटहा हे दुवारी
लईका रोए छुरछुरी ला कहीके
महगाई म गरीब बर का देवारी

धनतेरस म खीर मिठाई घरघर
सूख्खा रोटी नई हावय हमरबर
बम फटाखा कहा पाबो संगवारी
महगाई म गरीब बर का देवारी

लछमी ल लछमीवाला ह बिसाथे
मातरानी सोन के कलस म आथे
माटी कलस म तेल अटागे भारी
महगाई म गरीब बर का देवारी

सुरकदीस मिरचा बुझागे बम
अनारदाना नईहे टीकली हे कम
खाए बर तेल नईए बड़ दूखभारी
महगाई म गरीब बर का देवारी

भात कम पेज हवय ग अड़बड़
पताल थोरहा मिरचा के कलबल
दिया भूतागे अब कहाके फुलवारी
महगाई म गरीब बर का देवारी

सबो घर दमकत हे अंगना बारी
लिपाय पोताय कहरय जी छुहारी
धान लुवाएबर बाचे नईहे बनिहारी
महगाई म गरीब बर का देवारी ।

मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

** दिया जलाए भरले का होही ? **


जखम म ककरो मलहम कभु लगाए नही
अंतस के पीरा ककरो तारे सवारे नही 
घर-देहरी म दिया जलाए भरले का होही ?

दाई ददा ल बुढहतबेरा म घरले निकाले
दारु जूवा म पइसा खेती बारी ल बेच डारे
गरीब मनखे डोकरी-डोकरा ल ताना मारे
महतारी दूखियारी के पीरा कभु नइ जाने
देवारी रतिहा लछमी पूजापाठ ले का होही
घर-देहरी म दिया जलाए भरले का होही ?

मनखे ल मनखे सही कभु तो तय नई जाने
डोकरा सियनहा के कहना ल नई तो माने
अपनेच सही दूसर के ईज्जत ल नई समझे
गिरे परे मनखे के दरद ल कभु नई पहिचाने
देखावा करे अउ गलती ल तोपे ले का होही
घर-देहरी म दिया जलाए भरले का होही ?

रंग-रंगोली टीमीक टामक बर दीया जलाए
सतमारग परकास दिखईया दीया नई लाए
लछमी बम कटरिना छुरछुरी मुरगा मनभाए
छानही म चढ़के राकेट म आगी तय धराए
सत के रद्दा रेंग ग कोदू जीनगी सवर जाही
घर-देहरी म दिया जलाए भरले का होही ?
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मिलन मलरिहा