मंगलवार, 20 जनवरी 2026

मुसकराज

 यह कहानी किसी सामान्य चूहे की नहीं, बल्कि 'मिस्टर मुसकराज' की है, जो अपनी पूंछ से फाइलें पलटता था और अपनी मूंछों से बड़े-बड़े घोटाले सूंघ लेता था।

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 मिस्टर मुसकराज ने सरकारी गोदामों और बैंक के सर्वरों में ऐसी सेंध लगाई कि सात करोड़ का अनाज और फंड डकार लिया। जब जांच शुरू हुई, तो वह किसी जहाज के आलीशान केबिन में छिपकर स्विट्जरलैंड और दुबई जैसे देशों के 'विदेशी दौरे' पर निकल गया। वह वहां की आलीशान होटलों की रसोई में सबसे महंगी पनीर खाता और अपनी सेल्फी 'रैट-ग्राम' पर डालता।

 इधर शहर की बिल्लियां, जो साल भर से भूखी थीं, यह देखकर आगबबूला हो गईं। उन्होंने तय किया कि अब वे चूहों का पीछा गलियों में नहीं, बल्कि 'ग्लोबल लेवल' पर करेंगी।

 द ग्रेट कैट समिट (बिल्लियों का महासम्मेलन)

 शहर के एक पुराने कोल्ड स्टोरेज के पीछे एक गुप्त बैठक हुई। इसमें तीन मुख्य बिल्लियों ने कमान संभाली:

 बिल्लो रानी (रणनीति विशेषज्ञ): जो फाइलों को पढ़ने में माहिर थी।

 टाइगर (फील्ड एजेंट): एक हट्टा-कट्टा बिल्ला जो छलांग लगाने में उस्ताद था।

 लुसी (तकनीकी विशेषज्ञ): एक विदेशी नस्ल की बिल्ली जो लैपटॉप चलाना जानती थी।

 योजना (ऑपरेशन जाल):

बिल्लो रानी ने कहा, "मुसकराज को अनाज का लालच नहीं है, उसे 'दिखावे' की बीमारी है। हम उसे पकड़ने के लिए एक फर्जी 'इंटरनेशनल बिजनेस चूहा अवार्ड्स' का आयोजन करेंगे।"

 जाल बिछाया गया

 लुसी ने एक फर्जी वेबसाइट बनाई और मुसकराज को ईमेल भेजा -- "बधाई हो! आपको 'सदी का सबसे प्रभावशाली चूहा' चुना गया है। सम्मान ग्रहण करने के लिए पेरिस के पास एक गुप्त टापू पर आएं।"

 मुसकराज लालच में आ गया। उसे लगा कि अब उसकी शोहरत सात समंदर पार और बढ़ जाएगी। वह अपने प्राइवेट जेट

 (जो असल में एक मालगाड़ी का डिब्बा था) से तय जगह पर पहुंचा।

(( अनोखा क्लाइमेक्स))

 जैसे ही मुसकराज रेड कार्पेट पर चला, वहां कोई फोटोग्राफर नहीं था। अचानक चारों तरफ से 'म्याऊं' की आवाजें गूंज उठीं। बिल्लियों ने उसे घेर लिया था।

 मुसकराज कांपते हुए बोला, "रुको! तुम मुझे नहीं मार सकतीं। मेरे पास सात करोड़ का हिसाब है। अगर मुझे कुछ हुआ, तो वो पैसा किसी को नहीं मिलेगा।"

 बिल्लो रानी मुस्कुराई और बोली, "हमें तुम्हारा पैसा नहीं चाहिए मुसकराज। हमें तो वह 'पासवर्ड' चाहिए जिससे तुम उन विदेशी गोदामों का दरवाजा खोलते हो। हम अब चूहे नहीं खातीं, हम अब सीधे 'सिस्टम' का हिस्सा बनेंगी।"

 कहानी का मोड़: बिल्लियों ने मुसकराज को पुलिस को सौंपने के बजाय उसे अपना 'फाइनेंशियल एडवाइजर' बना लिया। मुसकराज अब जेल में नहीं, बल्कि बिल्लियों के आलीशान दफ्तर में बैठकर उनके लिए नए-नए 'शिकार' खोजने लगा।


 शिक्षा:-

 आज के जमाने में दुश्मन भी तब तक ही दुश्मन रहते हैं, जब तक बीच में 'फायदा' न आ जाए। एक बार मलाई का हिस्सा मिल जाए, तो बिल्ली और चूहा एक ही थाली में दूध पीने लगते हैं।

 

✍️मिलन मलरिहा 

20/1/26

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