शनिवार, 18 अप्रैल 2020

कोरोना Corona

कोरोना
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आये नोनी चीन ले, कोरोना हे नाम।
एकर पल्ला जे परे, तेकर काम तमाम।।

कई देश हा काप गे, भारत हे घबराय।
कोरोना के आज तक, दवा एक ना आय।।

मौसम हा इतरात हे, कोरोना के संग।
खतरा छाये देश मा, आज सबो हे दंग।।

करनी भुगतत चीन के, सबो देश हा आज।
कोरोना उपचार के, का हे एकर राज।।

जइसे बरसा होय मा, सबके छाँनी आय।
जात धरम ला टार के, कोरोना बरसाय।।

करके पूजा रोक ले, काबर तही लुकाय।।
मास्क लगाये देवता, जब कोरोना आय।।

कोरोना हा भागही, अपन बचाके जान।
एंटीबॉडी ला बना , जब आही विज्ञान।।

मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर छत्तीसगढ़
83193101

सबले बड़का जानवर, घर मा बइठे आज। तभे हवा निरमल लगे, होगे कुदरत साज।। होगे कुदरत साज, ढाय जबले कोरोना । तही बतादे सोंच, कोन रोवत हे रोना।। बिन चिंता के सोय, मित्र आये हे जबले। पशु पक्षी हर जीव, कहत घूमत हे सबले।। । मिलन मलरिहा 🙏

सबले बड़का जानवर, घर मा बइठे आज।
तभे हवा निरमल लगे, होगे कुदरत साज।।
होगे कुदरत साज, ढाय जबले कोरोना ।
तही बतादे सोंच, कोन रोवत हे रोना।।
बिन चिंता के सोय, मित्र आये हे जबले।
पशु पक्षी हर जीव, कहत घूमत हे सबले।।

रचना-मिलन मलरिहा


मंगलवार, 10 मार्च 2020

कहत वो, होली हे

बगल मा पौवा खोचे, कुकरी ला अरझाये 
लेड़ेड़ मेडेड़ रेंगे, कहत वो होली हे...

दरुहा सही हे जन, जमाना मा कछु होए
पइसा पाये वोट दे, कहत वो होली हे...

जनता हे मस्त सबो, भांग वांग लेके सोए
मोदी घर सिंधिया हे, कहत वो होली हे...

जनता ला बेवकूफ, नेतामन बनादिस
बहुमत तोड़ नाचे, कहत वो होली हे....

मिलन मलरिहा 
मल्हार बिलासपुर छत्तीसगढ़ 


शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

mahatma ganghi....milan malariha art


जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया, कविता अउ पेंसिल आर्ट ले श्रद्धांजलि - मिलन मलरिहा ।।। lakshman masturiya ......milan malariha art


*जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया*
#_प्रथम_पुण्यतिथि _ सादर नमन

तूमा नार बखरी मा रोवत, पाके चार होगे करिया जी ।
गोहरावत छंईहा भुंईया, तै कहाँ गये मस्तुरिया जी ।

परें डरें अऊ गिरे हपटे मनखे ब ढेखरा कोन गड़ाही।
सुमित के सरग निसैनी गढ़के सबला ला कोन रेंगाही।
कोन बताही अरपा-पैरी, गंगा ले सुग्घर फरिया जी.......

परबुधिया  टेड़गा  मनखे ला, कोन फटकार लगाही
छँईहा भुंईया छोड़ जवईया के फेर कोन चेत जगाही
छत्तीसगढ़िया झिन जाबे, खेत ल छोड़के परिया जी......

डोंगरी मँ मऊँहा छाय रहय जब आवय मांघ फागुनवा
खेत-खार जंगल सब झुमरय, मन हिलोर डारै किसनवां
बिन सुर धार कइसे पलही , सुख्खा होगे तरिया जी........

मिलन मलरिहा
मल्हार ,मस्तुरी बिलासपुर छग