गुरुवार, 16 अगस्त 2018
रविवार, 17 जून 2018
शनिवार, 19 मई 2018
रविवार, 13 मई 2018
माँ
माँ........
____________________________
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
आजतक मैंने, तुझको दिया ही क्या ?
जो किया, मैंने खुद के लिए किया ?
बस दिया, मुझसे तुने लिया ही क्या ?
आपने मुझमें पल पल सभ्यता गढ़ी
पर मैनें एकबार भी निभाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
आपने पत्थर में कमल खिला ही दिया
पर कमल पत्थरों में घर बसाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
मेरे लिए आपने कितनी यातनाएं सही
पर तुने कभी मुझे दुख जताया ही क्या......
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
______________________________
रचना--
मिलन
मलरिहा
____________________________
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
आजतक मैंने, तुझको दिया ही क्या ?
जो किया, मैंने खुद के लिए किया ?
बस दिया, मुझसे तुने लिया ही क्या ?
आपने मुझमें पल पल सभ्यता गढ़ी
पर मैनें एकबार भी निभाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
आपने पत्थर में कमल खिला ही दिया
पर कमल पत्थरों में घर बसाया ही क्या.....
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
मेरे लिए आपने कितनी यातनाएं सही
पर तुने कभी मुझे दुख जताया ही क्या......
हे माँ! मैंने तेरे लिए किया ही क्या ?
______________________________
रचना--
मिलन
मलरिहा
बुधवार, 21 मार्च 2018
रविवार, 4 फ़रवरी 2018
sher aur chuha (शेर और चूहा) -बालगीत
----------------------
बात बड़ी पुरानी है
एक चूहे की कहानी है
एक शेर था उस वन में
डर फैला था जन जन में
सारा जंगल परेशान था
बल का उसको अभिमान था
एकदिन आया वहां शिकारी
जाल फैलाया चउओर सारी
उसमें फस गया शेरु राजा
अकड़ का उसका बज गया बाजा
फिर चूहे को दया आ गया
जाल काटकर उसे बचाया
शेरु ने अपनी गलती मानी
जुरमिल कर रहने की ठानी
यही है जीवन की सच्चाई
छोटा बड़ा नई कोई भाई
।
मिलन मलरिहा
मल्हार
----------------------
शनिवार, 3 फ़रवरी 2018
आगे आगे फागुन
आगे आगे फागुन
""""""""""""""""""""""
आगे आगे फागुन रस टपके आमा मऊँरे
पड़की-मैना के मन ला खिंचत हावय रे
लाली लाली परसा ह दुल्ही बने बईठे हे
मेछा ताने सेम्हरा ह दूल्हा खड़े हे....
आगे आगे फागुन.........
/
खेतबीच नाँचतहे सरसो पीयर पीयर रे
मेड़ तीर समरतहे, लम्बु राहेर रे
दुनों झुमतहे जाबोन बरतिया कहिके
दऊड़ दऊड़ कोयली ह हाका पारत हे..
आगे आगे फागुन..........
/
डुमर सास ह चमचम चमकत हावय रे
मऊँहा ससुर ह पागा बाँधे हे
चार-कसही मन, साला-साली बने हे
देखतो सेम्हरा के भाग फहरे हे........
/
तिवरा-अकरी दुनो नवा जिंस पहिरे
चना-बटुरा बरतिया बने हे
बनकुकरा ह घुम घुम बलावत हावय
बरतिया खाये ल जाहा कहिके
आगे आगे फागुन.............
/
/
मिलन मलरिहा
मल्हार
""""""""""""""""""""""
आगे आगे फागुन रस टपके आमा मऊँरे
पड़की-मैना के मन ला खिंचत हावय रे
लाली लाली परसा ह दुल्ही बने बईठे हे
मेछा ताने सेम्हरा ह दूल्हा खड़े हे....
आगे आगे फागुन.........
/
खेतबीच नाँचतहे सरसो पीयर पीयर रे
मेड़ तीर समरतहे, लम्बु राहेर रे
दुनों झुमतहे जाबोन बरतिया कहिके
दऊड़ दऊड़ कोयली ह हाका पारत हे..
आगे आगे फागुन..........
/
डुमर सास ह चमचम चमकत हावय रे
मऊँहा ससुर ह पागा बाँधे हे
चार-कसही मन, साला-साली बने हे
देखतो सेम्हरा के भाग फहरे हे........
/
तिवरा-अकरी दुनो नवा जिंस पहिरे
चना-बटुरा बरतिया बने हे
बनकुकरा ह घुम घुम बलावत हावय
बरतिया खाये ल जाहा कहिके
आगे आगे फागुन.............
/
/
मिलन मलरिहा
मल्हार
माटी बर मया ल जगावा रे - मिलन मलारिहा
माटी बर मया ल जगावा रे
"""""""""""""""""""""""""""""""
बेचा था उत्ताधूर्रा खेत खलिहाने भुईया
गवागे नांगर संगी संगेसंग गाड़ा बईला
बबा के चिनहा ल तो राखा रे .............
माटी बर मया ल जगावा रे......
"""""""""""""""""""""""""""""""
बेचा था उत्ताधूर्रा खेत खलिहाने भुईया
गवागे नांगर संगी संगेसंग गाड़ा बईला
बबा के चिनहा ल तो राखा रे .............
माटी बर मया ल जगावा रे......
रुखराई जरगे सबो खेत खलियाने बरगे
हरियर भुईया खपगे गाँव गाँव फेक्टरी छागे
खेती बारी ल झीन भुलावा रे .............
हरियर भुईया खपगे गाँव गाँव फेक्टरी छागे
खेती बारी ल झीन भुलावा रे .............
नवा जूग आगे भईया संगेसंग सबो चलबो
दऊरी बेलन छोड़के हर्बेस्टर हमन धरबो
फेर पर्रु बर पैरा ल बचावा रे...............
दऊरी बेलन छोड़के हर्बेस्टर हमन धरबो
फेर पर्रु बर पैरा ल बचावा रे...............
पररजिया इहाँ छागे भाखा बोली ह बिछागे
ऊंकर भाखा तरी छत्तीसगढ़ी लदकागे
महतारी भाखा ल बचावा रे...............
..
::::मिलन मलरिहा:::
::::बिलासपुर:::
ऊंकर भाखा तरी छत्तीसगढ़ी लदकागे
महतारी भाखा ल बचावा रे...............
..
::::मिलन मलरिहा:::
::::बिलासपुर:::
बाल गीत// -कोयली आजा
बाल गीत//
"""""""""""""
कोयली आजा, गीत सुनाजा
बसंत आगे अब तो आजा
"""""""""""""
कोयली आजा, गीत सुनाजा
बसंत आगे अब तो आजा
सुनतो मैना कहाँ तै जाबे
मोर आरो ल ओला सुनाबे
मोर आरो ल ओला सुनाबे
भेंट डारबे त कहिबे ओला
सुन्ना लागे तोर बीन मोला
सुन्ना लागे तोर बीन मोला
तोर सहेली, पड़की अकेल्ला
पाके बेंदरा, मार डकेल्ला
पाके बेंदरा, मार डकेल्ला
लऊहा आजा, बसंत रानी
झीनकर तैहा अब मनमानी
झीनकर तैहा अब मनमानी

बालगीत - तिवरा बटकर
तिवरा बटकर
पुदक लटकर
आगे किसान
भाग रे झटकर
पुदक लटकर
आगे किसान
भाग रे झटकर
लऊठी धरे हे
गुस्सा करे हे
मटासी खार
राहेर फरे हे
गुस्सा करे हे
मटासी खार
राहेर फरे हे
चल ना जाबो
ऊहूच ला खाबो
बाचही तेला
घर ले आबो
ऊहूच ला खाबो
बाचही तेला
घर ले आबो
ए दीदी कोरी
हाँ बहन लोरी
माँग के खाबो
नई करन चोरी
।
मिलन मलरिहा
मल्हार
हाँ बहन लोरी
माँग के खाबो
नई करन चोरी
।
मिलन मलरिहा
मल्हार
लटकर=लटदार (बीज से भरें)
बटकर=(तीवर/मटर/राहेर) के कच्चे बीज
झटकर/लऊहा(झटकन)= जल्दी से
बटकर=(तीवर/मटर/राहेर) के कच्चे बीज
झटकर/लऊहा(झटकन)= जल्दी से


शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
सदस्यता लें
संदेश (Atom)











