शुक्रवार, 4 मार्च 2016

BETI ke DUKH

gada ravan

padhai le man jor le

... आगे बसंत सरसरी हवा.....

सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

***जिनगी के बोझा***



***जिनगी के बोझा***
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*****************दोहा*******************

नोनी बहनी नोहय ग, जिनगी के रे बोझ !
टूरा मनतो मारथे, कहू निकलथे सोझ !!
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बदला बिचार खूदके, बेटा बड़ाहि कूल !
अबके लइका टांगथे, दाई ददा ल सूल !!
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बोझ असल ओहीच हे, देत बुढ़ापा छोड़ !
भारी होथे दुख दरद, खसलत जिनगी मोड़ !!
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कपूत आके मेटथे, घर कुरिया अउ खेत !
गुनले तैहा जीवन म , बने लगाके चेत !!
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बड़े अमर-बेले जरी, दुसर खून चूसाय !
असल बोझ सनसारके, जेन लूट के खाय !!
-
आपी सोचा बोझ हे, कोन सकल संसार !
ओही जाने बोझ ला, भोगय दूख अपार !!
मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर
Photo//Google

**कवि मोला झिन कईहा संगी** मयतो एक छत्तीसगढ़िहा अव-

****आगे बसंत सरसरी हवा****


** का काम के ? **

******खुद ल गरीब बताथच******

चार दिन के हासी ठीठोली ल मया झीन कहिबे


चार दिन के हासी ठीठोली ल
मया झीन कहिबे
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छइहा म तो सबों मीठ गीत ल
सुघ्घर राग म गाथे
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जिनगी म घाम—आच आए ले
बड़े—बड़े पलातान हो जाथे
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मया के खालहे दूख के चिखला
जेन ह एला सहिथे
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अटल मयारु सबो बताथे
खड़बड़—खईया रद्दा ले दूरिहाथे
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हरियर तन के लालची मन
देवदास बने फिरथे
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चसमा टोपी जिन्स पहिरे
लुभावन मया जताथे
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बिपत परे म ओही देवदास संगी
कलेचुप खसक जाथे
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पढ़हार्इ् लिखाई के दिन म तै
साहरुक सलमान के गोठ टमरे
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इसटाइल मरवईया मयारु
जिनगी के दूख कईसे सहिबे
-
चार दिन के हासी ठीठोली ल
मया झीन कहिबे ।।
मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

लेवा आज फेर पढ़हव हमर छत्तीसगढ़ी भाषा के दरद ल सकेले मोर रचना.......

सोमवार, 11 जनवरी 2016

नवा बछर

नवा बछर म जून्ना कलेण्डर बदले भर ले का होही ?

बदलना हे त बीचार ल बदल समाज के मान होही

नसा कूबूध बुराई ल भेज दे 2015 के संगे

परघा सत ईमान अंजोर जीनगी उजियार होही

परन करले नवा बछर म गलती म सुधार लाबो

मया पीरित के गांव गलि म सुघ्घर किरतन गाबो

तोर मोर खचवा डबरा ल झांके ताके ले का होही ?

जाड़ म ठुठरत डोकरी डोकरा परे हे घर के कोन्टा

जग ल मेसेज भेजे अउ गिफ्ट देहे भर ले का होही ?

नवा बछर म जून्ना कलेण्डर बदले भर ले का होही ?
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मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

**कवि मोला झिन कईहा**

**कवि मोला झिन कईहा**
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कवि मोला झिन कईहा संगी
मयतो एक छत्तीसगढ़िहा अव
नांगर के जोतईया मय ग
बईला-भईसा के चरईया अव
कवि मोला..........................


चटनी बासी के खवईया मय ह
बर-छाईहा के सुतईया अव
फदके झगरा- लड़ाई हे कहूँ त
सबो के मय समझईया अव
कवि मोला..........................


मय तो मया बगरईया अव
दूखपीरा के पियईया अव
बुता-बनी कमईया अव ग
सबके बोझा बोहईया अव
कवि मोला..........................


मोटर न सईकल मोर दूवारी
उखरा गोड़ के चलईया अव
रेंगईया अव कई कोस मय हर
मूड़ी म खुमरी के बंधईया अव
कवि मोला..........................


बेलासपुर मल्हारे रहईया मय ह
निच्चट छत्तीसगढ़ी बोलईया अव
मनदिर मसजीद जवईया नोहव
दाई ददा के गोड़ चपकईया अव
कवि मोला..........................
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मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

जिनगी म का हे ?**

**जिनगी म का हे ?**
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जिनगी म का हे
मेलजोल अउ मया हे
सबले हासना गुठीयाना हे
इही तो जिनगी के खजाना हे
सब मनखे मनखे एकेच समाना हे।
जिनगी म.......................................

जिनगी म का हे
सबके आसिरवाद हे
सुखदूख के छईहा अउ घाम हे
आना जाना सबो के एके समान हे
खचवा डिपरा त कहू पाठेपाठ बरोबर हे।
जिनगी म............................................

जिनगी म का हे
मया अउ पीरा बड़ हे
एकर चक्का नर अउ नारी हे
एहर तो गाड़ी हे सबो परवार सवारी हे
एकाक चक्का टूटथे गिरथे मुड़भरसा-उतानी हे।
जिनगी म...................................................

जिनगी म का हे
दूखदरद के हिस्सा हे
सबके अपन अपन किस्सा हे
कहूँ चटनी कहूँ मेवा कहूँ सुख्खा रोटी हे
कहूँ जूवा कहूँ दारु सबोके दूख सहइया बेटी हे।
जिनगी म...................................................

जिनगी म का हे
कहू लीम कहू बरछाव हे
ओतकेकन सुख ओतकेकन घांव हे
सबला तो जाना हे त काबर गरभ- ताव हे
ए ठुड़गा बमरी ल ऐकदिन चूल्हा म जोराना तो हे।
जिनगी म......................................................

मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

नवा बछर म का चरित्तर आगे


मिलन मलरिहा's photo.

**नवा बछर म का चरित्तर आगे **

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2015 म लईका अउ जवान
सबो बेरा मोबाइल के धियान
इन्टरनेटवा बनगे सबके परान
अब 2016 म थीरी-जी छागे
जेमा डोकरा मन घलो झोरसागे
नवा बछर म का चरित्तर आगे ?


नवा जूगके इही भगवान बनगे
इनटरनेट के नदिया बोहागे
गाँव गलिखोल सबो समागे
वाट्सेफ धून घरोघर मतागे
दूनियाभर ह इही म बोजागे
नवा बछर म.......................

डोकरा लईका सियान भाए
दाई-ददा ह घलो मूड़ी नवाए
मोर बबा घलो गुरुफ बनाए
गुरुफ म एडमिन नाव रखागे
नवानवा दोस्ती-यारी छागे
नवा बछर म.......................

कापी पेस्ट ल रोज पेलत हे
एति के ओति ओहर ढिलत हे
महिना म कई हजार फूकत हे
गुरुफ गुरुफ म नाव बड़त हे
मुड़ी म ओखर इन्टरनेट जागे
नवा बछर म.......................

आनिबानी के सनिमा देखत हे
फोन ल दिनभर लाॅक करत हे
डर म मोर लुकावत चपकत हे
उमर के ओला फिकर नई हे
धान बेच मोबाईल खरिदागे
नवा बछर म.......................

पोरफाईल म तो जवान देखात हे
वाट्सेप संगे फेसबूक चलात हे
दूनियाभर ल लाईक मारत हे
बने-बने ल जी सेयर चपकत हे
संगी-यारी के फाईल टैग पेलागे
नवा बछर म...........................

गांव भर के फेसबूक पेज बनाए
मोबाईल संगे लेपटाॅप बिसाए
बबा गाँव म ब्राडबेन्ड लगवाए
वाई-फाई ल पूरा गाँव बगराए
नेट चलवईया जागरुक होगे
गाॅवभर बबा ल सरपंच जितागे
नवा बछर म...........................


मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर