मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019
मंगलवार, 18 जून 2019
सोमवार, 10 जून 2019
मंगलवार, 14 मई 2019
गुरुवार, 9 मई 2019
शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019
गुरुवार, 18 अप्रैल 2019
सोमवार, 15 अप्रैल 2019
शनिवार, 13 अप्रैल 2019
मंगलवार, 2 अप्रैल 2019
शुक्रवार, 4 जनवरी 2019
गाड़ा रवन ले राजमार्ग- छत्तीसगढ़ी लेख
बीस बछर पहली, जेन गाड़ा रवन रहीस, तेन हर आज डामर के पक्की रोड बनगे, गाड़ा-बईला रेंगय तेमा आज भर्रौहन मोटर-गाड़ी दऊड़त हे, ए पार ले, ओ पार जाय मँ कई अपन जीव गवां देथे, पहली गाड़ा के आघू कोनो लईका खेतल खालत आ जावय त बईला अपने आप रुक जावत रहीस..जेन अब कम दिखथे।
गाड़ा-रवन ल राजमार्ग बने के बधाई देहेबर गैंव त ओहा मोटर-गाड़ी के हाॅव-भाव-काॅव, सोर-सराका मं मोर आरो ल नई सुन पाइस लगथे..गलती मोर रहीस की मैं थोकिन कमजोरहा आरों दे पारेव l
मैं घर लहुटतेच रहें कि आरों आगे "thanks milan".. मोला अचंभव लागीस कि जय-जोहार (पैलगी) करईया ह आज thanks कथे.. बने चेत धरके सुनेव त गाड़ा-रवन कहत रहीस -"मैं अब वो रवन नई रहिगेव, मैं राजमार्ग हवं राजमार्ग धोतीछाप पैदल मनखे के रेंगे खातिर सरकार ह मोला नई बनाय हे बलकि मोला, गाड़ी-मोटर, टरक-डंफर के दऊड़ेबर बनाय हे Please go from side to side....
//// मिलन मलरिहा///// मल्हार बिलासपुर
गाड़ा-रवन ल राजमार्ग बने के बधाई देहेबर गैंव त ओहा मोटर-गाड़ी के हाॅव-भाव-काॅव, सोर-सराका मं मोर आरो ल नई सुन पाइस लगथे..गलती मोर रहीस की मैं थोकिन कमजोरहा आरों दे पारेव l
मैं घर लहुटतेच रहें कि आरों आगे "thanks milan".. मोला अचंभव लागीस कि जय-जोहार (पैलगी) करईया ह आज thanks कथे.. बने चेत धरके सुनेव त गाड़ा-रवन कहत रहीस -"मैं अब वो रवन नई रहिगेव, मैं राजमार्ग हवं राजमार्ग धोतीछाप पैदल मनखे के रेंगे खातिर सरकार ह मोला नई बनाय हे बलकि मोला, गाड़ी-मोटर, टरक-डंफर के दऊड़ेबर बनाय हे Please go from side to side....
//// मिलन मलरिहा///// मल्हार बिलासपुर
रविवार, 21 अक्टूबर 2018
आगे आगे फागुन- गीत । मिलन मलरिहा
//*आगे आगे फागुन*//
"""""""""""""""""""""""""""""
आगे आगे फागुन रस टपके आमा के मऊँरे
पड़की-मैना के मन ला खिंचत हावय रे
लाली लाली परसा ह दुल्ही बने बईठे हे
मेछा ताने सेम्हरा ह दूल्हा खड़े हे....
आगे आगे फागुन.........
/
खेतबीच नाँचतहे सरसो पीयर पीयर रे
मेड़ तीर मटकतहे, लम्बु राहेर रे
दुनों झुमतहे जाबोन बरतिया कहिके
दऊड़ दऊड़ कोयली ह हाका पारत हे..
आगे आगे फागुन..........
/
डुमर सास ह चमचम चमकत हावय रे
मऊँहा ससुर ह पागा बाँधे हे
चार-कसही मन, साला-साली बने हे
देखतो सेम्हरा के भाग जागे हे........
/
तिवरा-अकरी दुनो नवा जिंस पहिरे
चना-बटुरा बरतिया बने हे
बनकुकरा ह मोहरी ल तानत हावय
बरतिया खाये ल जाहा कहिके
आगे आगे फागुन.............
/
/
मिलन मलरिहा
मल्हार
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आगे आगे फागुन रस टपके आमा के मऊँरे
पड़की-मैना के मन ला खिंचत हावय रे
लाली लाली परसा ह दुल्ही बने बईठे हे
मेछा ताने सेम्हरा ह दूल्हा खड़े हे....
आगे आगे फागुन.........
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खेतबीच नाँचतहे सरसो पीयर पीयर रे
मेड़ तीर मटकतहे, लम्बु राहेर रे
दुनों झुमतहे जाबोन बरतिया कहिके
दऊड़ दऊड़ कोयली ह हाका पारत हे..
आगे आगे फागुन..........
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डुमर सास ह चमचम चमकत हावय रे
मऊँहा ससुर ह पागा बाँधे हे
चार-कसही मन, साला-साली बने हे
देखतो सेम्हरा के भाग जागे हे........
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तिवरा-अकरी दुनो नवा जिंस पहिरे
चना-बटुरा बरतिया बने हे
बनकुकरा ह मोहरी ल तानत हावय
बरतिया खाये ल जाहा कहिके
आगे आगे फागुन.............
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मिलन मलरिहा
मल्हार
मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018
गुरुवार, 16 अगस्त 2018
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