गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022

छत्‍तीसगढ़ी के यशस्‍वी कवि दानेश्वर शर्मा

छत्‍तीसगढ़ी के यशस्‍वी कवि दानेश्वर शर्मा

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हिन्‍दी अउ छत्‍तीसगढ़ी के यशस्‍वी कवि दानेश्वर शर्मा जी के जन्म 10 मई 1931 ग्राम मेडेसरा, जिला दुर्ग (छत्तीसगढ़) (म.प्र.) मं होइस । पिता के नाम पं. गंगा प्रसाद द्विवेदी अउ माता श्रीमती इन्दिरा द्विवेदी।  दानेश्‍वर शर्मा,बी.ए. एल.एल.बी. वकालत के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र 

के संपादकीय विकास विभाग मं प्रबंधक के पद मा अपन सेवा दिस। हिन्‍दी, छत्‍तीसगढी ,अंगेजी अउ संस्‍कृत भाषा मं  सतत मौलिक लेखनी अउ मिलनसार व्यक्तित्व हा ओला अखिल भारतीय स्तर के साहित्यकार के रुप मं स्थापित करिस। 

 शर्मा जी के साहित्य लेखन 1955 मं आरंभ होइस। उंकर पहली रचना #बेटी_के_बिदा 1966 ई. मं सबके सामने आइस।  लोककला ला मूल स्वरुप मं सकेले के उदिम वाले विचारधारा ही ओला चंदैनी गोंदा के सर्जक #दाऊ_रामचन्द्र_देशमुख अउ डाॅ. खूबचंद बघेल के समविचारिक बनाथे। बघेरा के काव्य गोष्ठी मं दाऊ जी संग एतिहासिक छायाचित्र (डाॅ. सुरेश देशमुख के किताब - चंदैनी गोंदा) मन एंकर पुष्टि करथे। 

दानेश्वर शर्मा जी के रचना के प्रकाशन अखण्‍ड ज्‍योति, 

नागपुर टाइम्‍स (अंग्रेजी दैनिक) साप्‍ताहिक हिन्‍दुस्‍तान, ब्लिट्ज, धर्मयुग, स्‍थानीय पत्र-पत्रिका मनके संगे संग प्रसारण दूरदर्शन, आकाशवाणी केन्द नागपुर, रायपुर, भोपाल, इंदौर, रीवां, छतरपुर,  इलाहाबाद के  केन्‍द्र ले सरलग होवत रहिस।

 दैनिक भास्‍कर अउ नव-भारत दैनिक मं तीन साल ले  लोक दर्शन नाम ले उॅंकर ललित निबन्‍ध स्तंभ लेखन बड़ लोक प्रचलित होइस।


प्रकाशित पुस्‍तक--

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 #छत्‍तीसगढ_के_लोक_गीत (विवेचना  सन् 1962), 

#हर_मौसम_में_छन्‍द_लिखूंगा (हिन्‍दी गीत संग्रह सन् 1993), 

#लव_कुश -(खण्‍ड काव्‍य सन् 2001), 

#लोक_दर्शन (अनेक धर्म दर्शन व परब-तिहार बर निबंध संग्रह, सन् 2003) 

#तपत_करू_भई_तपत_कुरू ( छत्‍तीसगढ़ी कविता संग्रह --2006) 

#गीत_अगीत  (हिन्‍दी काव्‍य संग्रह -सन्  2007)


रविशंकर विश्‍वविद्यालय के एम.ए. (हिन्‍दी) के लोक साहित्‍य विषय  निर्धारित छत्‍तीसगढी काव्‍य संकलन वर्तमान मं निर्धारित छत्‍तीसगढी भाषा अउ साहित्‍य किताब मन मं घलो शर्मा जी के कवितामन संग्रहित हावय।


शर्मा जी के लेखन आभा छत्तीसगढ़ भारत मं तो हवय ही संगे संग देश ले बाहिर भी छाप छोड़े हे। जइसे शिकागो विश्‍वविद्यालय ले प्रका‍शित रिवोलुशनिज्‍म इन छत्‍तीसगढ़ी पोएट्री मं घलो मिलथे। शर्मा विश्‍व प्रसिद्ध संस्‍था फोर्ड फाउन्‍डेशन ले प्रकाशित 11 पुस्‍तक के संपादक सलाहकार घलो रह चूके हे।

छत्‍तीसगढ मं ग्रामोफोन रिकाडर्स के कैसेट के ओ समय भारी चर्चा रहिस जेमा शर्मा जी के सर्वाधिक गीत के रिकार्डिंग होय रहिस जेला स्वर देके बैतलराम साहू छत्तीसगढ़िया किशोर कुमार के नाम ले मशहूर होइस। 

 ओ बेरा देश के सबले प्रसिद्ध कंपनी  हिज मास्‍टर्स वायस (कलकत्‍ता)।  म्‍यूजिक इंडिया- पोलीडोर (मुंबई),  सरगम- रिकार्डस -(बनारस) अउ वीनस कैसेट्स (मुंबई) मं छत्तीसगढ़िया रंग चढ़िस।

छत्तीसगढ़ी फीचर फिल्‍म मोर धरती मईया मं  इंकर गीत आपमन जरुर सुने होहा।


भिलाई इस्‍पात संयंत्र मं प्रतिवर्ष आयोजित #छत्‍तीसगढ़_लोक_कला _महोत्‍सव हा शर्मा जी के देश आय। इही मंच ले पंथी नर्तक देवदास, पंडवानी गायिका पदमभूषण तीजन बाई, रितु वर्मा जइसे अनेक कलाकार मनला देश-प्रदेश पहुचाॅंइस अउ राष्‍ट्रीय सम्‍मान इंकर झोला मं लाके रखिस। 

श्री दानेश्‍वर शर्मा जी श्रीमदभागवत महापुराण के श्रेष्ठ कथावाचक के रुप मं घलो देश में प्रसिद्ध रहिस, ओला

 सन् 2006 मं  राष्‍ट्रपति के द्वारा साहित्‍य सम्‍मान प्राप्‍त होइस अउ सन् 2007 मं अमेरिका के न्‍यूयार्क शहर मं आयोजित आठवईयां विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन मं छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधित्व करें के अवशर मिलिस।


शर्मा जी के प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीत--

१ दाई ओ ददा गो लइका बर फुग्गा ले दे...

२ मोर सारी परम पियारी....

३ लाखों मं एकझन हावै गा मोर समधिन..

४ तपतकुरु भइ तपतकुरु बोल रे मिट्ठू ...

श्री दानेश्वर शर्मा जी के साहित्यिक गुरु जनकवि कोदूराम दलित जी रहिन।

1955 ले साहित्य के सतत सेवा करत, छत्तीसगढ़ राजभाषा के पदेन अध्यक्ष (द्वितीय) के रुप मं छत्तीसगढ़ी के सेवा करके आज रतिहा दिनांक 03-02-2022 श्री दानेश्वर शर्मा जी छत्तीसगढ़ साहित्य संसार ले विदा होगे।

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आलेख -

✍️मिलन मलरिहा

04/02/2022

 

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